Bachho ke confidence ko kaise badhayen?बच्चो के कॉन्फिडेंस को बढ़ाएं?
Bachho ke confidence ko kaise badhayen:बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो उनके समृद्धि और समाज में सफलता में मदद कर सकती है। यहाँ कुछ ऐसे तरीके हैं जिनके द्वारा आप बच्चों के कॉन्फिडेंस को बढ़ाया जा सकता है।
ये बहुत ही दुःख की की बात है की ,हर साल हज़ारो बच्चे सेल्फ फोंफिडेन्स की कमी के कारण तनाव बर्दास्त नहीं कर पाते है वो आत्म हत्या कर लेते हैं। हमे इसके लिए तैयारी करनी होगी , बच्चो में एक समझ विकसित करनी होगी , एक माता पिता होने के नाते हमे अपने बच्चो के सामने हमेशा positive रहना होगा , हमारे पॉजिटिव रहने से bachho ke confidence में बढ़ोतरी होगी , कोई भी काम हो बच्चो से कहें हो जायेगा निराश न हो
स्ट्रेस को हैंडल करना सिखाये !
उनको नहीं पता स्ट्रेस को कैसे हैंडल करना है , कैसे इससे हम निपट सकते है, कैसे इससे बाहर आकर तनाव मुक्त जीवन जिया जाये। इसकी वजह भी हम ही है शायद हम उनको अच्छी दिशा निर्देष ही नहीं दे पा रहे हैं , उनको मोटीवेट नहीं कर पा रहे है ,उसका दूसरा कारन हमारा सामजिक और पारिवारिक वातावरण भी अच्छा न होना ,एक बड़ी वजह बन जाता है ,
बच्चो के लिए बहुत जरूरी होना चाहिए की वो स्ट्रेस होने न दे या स्ट्रेस को हैंडल करना आना चाहिए उसको अपने ऊपर हावी न होने दें तनाव हमारी जिंदगी का एक छोटा सा पार्ट है , जो हालातो के अनुसार हमसे जुड़ा रहता है , जिंदगी में उतार चढाव है तो तनाव भी है , थोड़ी ख़ुशी थोड़े गम थोड़े आंसू , इसी का नाम जिंदगी है ,
आज हालात ख़राब है तो कल अच्छे भी होंगे ,आज दुःख है तो कल ख़ुशी भी होगी , जिंदगी में अगर दुःख न हो तो ख़ुशी का कोई महत्व ही नहीं रह जायेगा। इसलिए हमे हालातो को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए हालातो के साथ चलना चाहिए।
बच्चो को ध्यान और प्राणयाम सिखाएं !
बच्चों के लिए ऐसी चीज महत्वपूर्ण है , जिसे उन तक पहुँचाना आसान हो योग, ध्यान जैसी विषय के बारे में बच्चो को बताये ,जो उनके लिए जटिल न हो ,एक चीज जो सबसे महत्वपूर्ण है , अगर 5 से 10 साल में बीच में ही बच्चो को ध्यान सिखाया जाये , तो यह उनके मानसिक विकास के लिए बहुत ही शानदार चीज है।
अपने दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाये। इसको रेगुलर करे प्राणायम हमारे लिए उतना ही महतवपूर्ण है जितना भोजन शरीर के लिए , ये हमारी सबसे बड़ी गलती करते है , ध्यान और प्राणयाम को हम , साधारण समझने की भूल करते है , शारीरिक व्यायाम से हम अपने शरीर को तो बलिष्ट कर लेते है , लेकिन आत्मिक बल के लिए बहुत ही ज्यादा आवश्यक है ध्यान और प्राणायम।
बच्चों में रासायनिक संतुलन लाना।
आत्महत्या का सबसे बड़ा करण है उनकी भावनाओ को नियंत्रण न कर पाना , आपके जीवन में भी ऐसा कितनी बार हुआ जब लगा होगा की खुद को मार देना चाहिए मगर हमने ऐसे कुछ नहीं किया वो पल गुजर गया ,जिनकी आत्महत्या की भावनाएं ज्यादा प्रबल हो जाती है वो आत्महत्या कर लेते है , जिन बच्चो में जीवन का उत्साह उमड़ना चाहिए , ये कल्पना से परे है की वो अपना जीवन ख़त्म करने की सोच रहे है।
सबसे महत्वपूर्ण चीज ये होनी चाहिए की हमे अपनी शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना चाहिए ,
एक डॉक्टर एक शिक्षक जो आध्यात्मिक टीचर है उनको प्रोफ़ेसनली न होकर अपने काम से प्रेम होना चाहिए एक अध्यापक को अपने शिष्य से प्रेम होना चाहिए एक डॉक्टर को अपने मरीज से प्रेम होना चाहिए।
इन सबको अच्छे से चलना चाहिए। जब लोग खुश होते है आप उनसे खूब मजाक कर सकते है , लेकिन वो अच्छे मूड में नहीं तो आपको थोड़ी भी मजाक भारी पड सकती है ,बच्चो को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होने वाले अभ्यास कराये
भावनात्मक संतुलन लाना बहुत जरूरी है। ये न केवल बच्चो को आत्महत्या से बचाएगा बल्कि उनकी काबिलियत को भी बढ़ाएगा।
अपने बच्चो के रोल मॉडल खुद बने Become a role model for your children
अपने आप इतने कामयाब तो हो जाओ की अपने बच्चो को दूसरो का उदाहरण ना देना पड़े , बच्चे हमेशा आपको एक सफल इंसान के रूप में देखे , यह उनके विकास में मदद कर सकता है,तभी बच्चे कुछ अच्छा कर पाएंगे
शिक्षा का महत्व: अपने बच्चों को शिक्षा के महत्व को जरूर समझाएं और उन्हें शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करें।उन्हें बताएं एक शिक्षित और अशिक्षित व्यक्ति के जीवन में अंतर आप स्वयं भी अच्छी किताबों का अध्यन करें
संतुलित जीवन: अपने कार्य और जिंदगी के बीच बैलेंस बनाए रखने का प्रदर्शन करें ताकि आपके बच्चो को समझ आ जाये कि कैसे एक सफल और खुश जीवन का संतुलन बनाया जा सकता है।
समर्थन और प्रेरणा Support and inspiration
अपने बच्चो को समर्थन देना कभी न भूलें उन्हें समर्थन दें और उन्हें सही समय पर प्रेरित करते रहे , आपको उनके काम की सरहाना करनी चाहिए उनकी सफलताओं की प्रशंसा करें और उन्हें यह महसूस कराएं कि आप उनपर गर्व करते हैं , आप उनको स्पेशल मानते हैं। आप उनके जीवन में बहुत महत्व रखते हैं।
सकारात्मक संवाद Positive Communication.
हमेशा सकारात्मक भाषा का ही इस्तेमाल करें। उनके जीवन में पाजिटिविटी आपके द्वारा ही आ सकती है उनको सकारत्मकता के प्रति जागरूक करें। उन्हें सुनने का समय दें और उनकी बातें महत्वपूर्ण मानें। उनकी सभी बातो को गंभीरता से सुने , उनकी बातो को बच्चो की बात कहकर न टालें। उनपर ध्यान दें।
स्वतंत्रता और जिम्मेदारी freedom and responsibility
उनके अपने निर्णयों को गलत न ठहराएं। उनके निर्णयों को सवतंतता से सामना करना बातएं सही निर्णय लेने में उनकी मदद करें जिम्मेदारी सीखने का मौका दें ताकि वे अपनी गलतियों से सीख सकें। उन्हें बताएं गलतियां करना ,ही सीखना होता है।
उनमे स्किल्स विकसित करें Develop their skills
उनके रूचियों और प्रतिभाओं को पहचानें और उन्हें बढ़ावा दें। उनके इंट्रेस्ट के अनुसार उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें।
कौशल विकसित करने के लिए उन्हें संबोधित करें और प्रशिक्षण प्रदान करें। सही स्किल्स सीखना और उनको आधार बनायें आगे बढ़ने में काफी मददगार साबित होगा।
बच्चो को स्वास्थ्य पर ध्यान देना बताएं Tell children to pay attention to health
बच्चो को बताएं स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से उनकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कैसे ठीक रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्हें समझें की अच्छे स्वस्थ के लिए नियमित नींद भी महत्वपूर्ण है।
सामाजिक कौशल Social skills
स्वाभाविकता से दोस्त बनने की प्रक्रिया में उनकी मदद करें। social skills विकसित करने के लिए उन्हें सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरणा दें , समाज का महत्त्व समझाएं। सामाजिक प्रतिष्ठा कितनी महत्वपूर्ण है , समझाएं।
मानवीय संबंध Human Relations
परिवार और मित्रों के साथ सजग और सहानुभूति wala भाव बनाए रखने के लिए कहें
उन्हें यह सिखाएं कि गलतियों का सामना करना एक नैतिक रेस्पोंडेंट का स्वाभाविक हिस्सा है और यह सीखने का एक अच्छा मौका है।
ये सभी उपरोक्त तरीके आपको मदद कर सकते हैं Bachho ke confidence को बढ़ाने में। ध्यान दें कि हर बच्चा अद्वितीय होता है, इसलिए उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझकर उनके साथ सही तरीके से बातचीत करना महत्वपूर्ण है।
इन्हे भी पढ़ें Constable Recruitment, अप्लाई ऑनलाइन